हत्या

फिर देखने को मिले वे दर्दनाक नजारे। वे तिरंगे में लिपटे हुए कच्ची लकड़ी के ताबूत, उन पर रखी गई गेंदे के फूलों की मालाएं...उन बहादुर जवानों को इस देश के लोगों की आखिरी भेंट। फिर सुनने को मिले हमारे गृह मंत्री से वही भाषण, जो हम बहुत बार सुन चुके हैं। हम नहीं बख्शेंगे उनको जिन्होंने ऐसा किया है, हत्यारों को ढूंढेंगे हम और उनको दंडित करेंगे।

 

एक मामूली गरीब महिला है विजय कुमारी। उसकी कहानी इतनी आम है कि उसके बारे में आप न तो टेलीविजन के चैनलों पर सुनेंगे और न ही अखबारों में पढ़ेंगे।

बीबीसी पर पिछले दिनों अगर उसकी कहानी न दर्शाई गई होती, तो शायद मुझे भी उसके बारे में कुछ मालूम न होता, बावजूद इसके कि मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती कि हूं उन अनाम, रोजमर्रा की नाइंसाफियों के बारे में लिखने की, जो अदृश्य रह जाती हैं। तो सुनिए, विजय कुमारी की कहानी।

राज्य सिर्फ व्यवस्था है ,फंकशनल है कि वह मुल्क में अव्यवस्था न होने दें । और राज्य इसलिए नहीं है कि स्वतंत्रता छीन ले ।राज्य इसलिए है कोई व्यक्ति  कोई व्यक्ति किसी की  स्वतंत्रता छीनने न पाए। राज्य इसलिए है कि एक व्यक्ति दूसरे के स्वतंत्रता के जीवन में बाधा न डाल पाए । लेकिन धीरे –धीरे राज्य को पता चला कि हम ही सारी स्वतंत्रता क्यों नहीं छीन लें। राजनीतिज्ञ सदा ही पूरी शक्ति पाने का आकांक्षी रहा है। लेकिन आज तक मनुष्य जाति के इतिहास में राजनीतिज्ञ कभी पूरी ताकत नहीं पा सका। अब समाजवाद के नाम से पा सकता है।