सोनिया गांधी

हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

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स्वामीनाथन अय्यर

पी चिदंबरम साहब से एक सवाल पूछने का मौका मिलता मुझे, तो मेरा उनसे यह सवाल होता- भारत का कारवां क्यों लुटा? यह सवाल मैंने चुराया है एक मशहूर शेर से, जो कुछ इस तरह है, तू इधर-उधर की न बात कर, यह बता कारवां क्यों लुटा? वित्त मंत्री के लिए यह इसलिए मुनासिब है, क्योंकि वह उस सरकार में मंत्री हैं, जिसके शासनकाल में इतना नुकसान पहुंचाया गया है इस गरीब देश की अर्थव्यवस्था को कि जीडीपी (वार्षिक वृद्धि दर), जो कुछ वर्ष पहले दौड़ रही थी नौ फीसदी की रफ्तार से, पिछले वर्ष गिरकर पांच फीसदी तक पहुंच गई है।

 

इतने दूर हो गए हैं हमारे राजनेता देश के यथार्थ से कि ऐसा लगता है, उनका भारत कोई और है और हमारा कोई और। उनका भारत अब सीमित है दिल्ली शहर के लुटियंस के इलाके की सीमाओं तक। जब हमारे भारत के दर्शन करने निकलते हैं नेताजी, तब या तो हेलीकॉप्टर में आते हैं या बड़ी-बड़ी विदेशी गाड़ियों के काफिले में सवार होकर। अपने भारत के किसी गांव में जब पहुंचते हैं नेताजी महाराज, तो चमचों से फौरन घिर जाते हैं, जो उनको यथार्थ की झलक तक नहीं देखने देते।

यह सोचकर कितना अजीब लगता है कि देश में कुछ वर्ष पूर्व (लगभग एक दशक) पहले तक यदि किसी को टेलीफोन कनेक्शन लेना होता था तो उसे कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। टेलीफोन के लिए आवेदन फार्म हासिल करने से लेकर भरे आवेदन पत्र भरकर जमा कराने, अपने नंबर का इंतजार करने, घर में फोन लग जाने में दो से तीन साल तक लग जाया करते थे। इतना ही नहीं दो-तीन साल बाद भी नंबर तब आता था जब फार्म देने वाले बाबू से लेकर अधिकारी तक की मुट्ठी गर्म नहीं की जाती थी। इसके बाद भी जबतक कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर रसूखदार लोगों के पत्र आप की सिफारिश करते विभाग तक न पहुंचे थे, तबतक घर में फोन की घंटी बजन

हाल में योजना आयोग ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, यदि उसे सरकार ने मान लिया तो भारतीय समाज में न सिर्फ स्त्री की सामाजिक-आर्थिक हैसियत बढ़ेगी, बल्कि वह पति-पत्नी के रिश्ते में आमूल परिवर्तन भी ला सकता है।

योजना आयोग का वीमेंस एजेंसी एंड एमपॉवरमेंट नामक वर्किंग ग्रुप संपत्ति का अधिकार संबंधी एक ऐसा समग्र कानून चाहता है, जिसमें पति-पत्नी के बीच अलगाव होने या परित्याग की सूरत में दोनों के बीच कुल संपत्ति का बंटवारा बराबर-बराबर हो।