सेक्स

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में सभी पॉर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इसे निजी स्वतंत्रता का मामला बताया। संविधान के अनुच्छेद- 21 के तहत लोगों को व्यक्त‍िगत आजादी हासिल है। 
 
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा द्वारा वेश्यावृति को कानूनी मान्यता दिलाने संबंधी बयान भले ही देश में बहस का मुद्दा बन गया हो लेकिन देश में वेश्यावृति के माध्यम से जीवन यापन करने वाली लाखों सेक्स वर्कर्स को सुरक्षा, गरिमा और स्वास्थ प्रदान करने का एक मात्र यही तरीका है। 
 
हम भारतीय दुख-परेशानी, अन्याय और संघर्षों से खुद को अलिप्त रखने में  बहुत माहिर हैं। हम ऐसे जिंदगी जीते हैं जैसे देश की बड़ी समस्याओं का वजूद ही नहीं है। मैं कोई फैसला नहीं दे रहा हूं। इतनी तकलीफों और असमानता वाले देश में इनसे निपटने का एकमात्र यही तरीका है। 
 

17 दिसंबर के अंक में प्रकाशित अपने लेख में फौजिया रियाज ने मांग की है कि धारा 377 को खत्म कर देना चाहिए। होमोसेक्सुअलिटी पर सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद देशभर में इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। मामला सेक्सुअलिटी से जुड़ा हो तो लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 377 में आपसी सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक संबंध को भी जुर्म माना गया है। फिलहाल यह धारा वैलिड है, इसलिए यह जुर्म है। ऐसे में समलैंगिकता का समर्थन करने वालों की यह मांग तर्कसंगत लग सकती है कि इस धारा को ही खत्म कर दिया जाए। लेकिन इस मामले में भीड़ का

समलैंगिकों, किन्नरों और मुख्यधारा से अलग किसी भी सेक्शुअल प्राथमिकता वाले लोगों को लेकर सामाजिक बराबरी का नजरिया संसार के किसी भी देश, किसी भी सभ्यता में नहीं है। लेकिन उन्हें दंडनीय अपराधी मानने की धारणा अगर किसी बड़े लोकतांत्रिक समाज में आज भी जमी हुई है तो वह अपना भारत ही है। देश की सबसे ऊंची अदालत ने साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें ऐसे लोगों को इज्जत से जीने का अधिकार दिया गया था। ध्यान रहे कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में कोई नया हक मांगने वाली याचिका को स

अंतत: आठ साल चली लंबी लड़ाई के बाद महाराष्ट्र में डांस बार पर पाबंदी खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार पर प्रतिबंध खत्म करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को कायम रख सही फैसला दिया है। इसके पहले भी राज्यपाल ने प्रतिबंध संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। लेकिन राज्य सरकार पाबंदी लागू करने पर अड़ी रही और मध्यवर्ग की 75 हजार से ज्यादा युवतियां बेरोजगार हो गईं। इससे खराब बात तो यह हुई कि सरकार ने कोर्ट और मीडिया में उन पर जो अश्लील आरोप लगाए उनकी वजह से वे कोई दूसरा काम करने लायक नहीं रहीं। सरकार ने डांस बार को ऐसी जगह बताया जहां लोग लड़कियों से

देश की आर्थिक राजधानी व बड़े महानगरों में एक मुंबई को अन्य महानगरों की तुलना में मानसिक रूप से अधिक खुला और महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है। महाराष्ट्र के लोग भी प्रदेश की अन्य विशेषताओं के साथ-साथ अजंता और ऐलोरा की गुफाओं और उसकी चित्रकला व शिल्पकला पर भी बड़ा फक्र करते हैं। अजंता और ऐलोरा की ये वही गुफाएं हैं जिनमें प्रदर्शित नग्न और अर्द्धनग्न चित्रकलाओं और शिल्पकलाओं को सदियों से कला के उत्कृष्ट नमूने के तौर पर देखा गया है। यहां तक कि अधिकांश चित्रों और शिल्पों की छवियों को वात्स्यायन के कामसूत्र में कामकलाओं की सटीक व्याख्या करने के लिए भी उपयोग

दिल्ली गैंगरेप हादसे के बाद समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा तमाम तरह की मांगे की जा रही हैं और सुझाव दिए जा रहे हैं। हालांकि उनमे से अधिकांश बेहद बेतुके और बेसिर पैर के भी हैं। मजे की बात यह है कि बेतुके और बेसिर पैर की मांगें और सलाह सभी पक्षों (राजनैतिक दलों, अध्यात्मिक गुरुओं, प्रशासन और प्रदर्शनकारी) की ओर से समान रूप से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कोई लड़कियों को मर्यादा में रहने की बात कर रहा है तो कोई उन्हें सलीकेदार कपड़े पहनने की सलाह दिए जा रहा है। कोई घटना के लिए बलात्कारियों और लड़की दोनों को ही बराबर का दोषी बताते हुए ताली एक हाथ से न बजने की कहावत याद दिला रहा है