सेंटर फॉर सिविल सोसायटी

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी  (सीसीएस) और सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (सीएसएफ) द्वारा फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के संयुक्त तत्वावधान में फेडरेशन हाउस में 29 अगस्त 2013 को राइट टू एजुकेशन पोर्टल की लॉंचिंग की जा रही है। उद्घाटन समारोह के दौरान सांसद श्री नवीन जिंदल और श्री प्रकाश जावडेकर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगे।

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- अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के दिन रेहड़ी-पटरी व फेरी वालों के लिए मित्रवत व सुविधाजनक कानून बनाने की मांग पर बोले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

- समस्या के समाधान के लिए सियासतदारों पर निर्भर न रहने की दी सलाह

थैचरिज्म सरकार, बाजार व नागरिक संगठनों की उपयुक्त भूमिका वाले दर्शन पर आधारित था। सरकार को केवल उन्हीं कार्यों को करना चाहिए जो बाजार व नागरिक संगठन प्रभावी ढंग से नहीं कर सकते। और मुक्त प्रतियोगिता बाजार का बेहतर नियामक और उपभोक्ताओं का बेहतर संरक्षक है।

दिल्ली के निजी व महंगे स्कूलों द्वारा अब पड़ोस के आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़ी जाति के छात्रों को निशुल्क दाखिला देने से इंकार करना संभव नहीं हो सकेगा। जी हां, पड़ोस के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले की चाह रखने वाले गरीब व पिछड़ी जाति के छात्रों के अभिभावकों को अब पर्याप्त जानकारी के अभाव में भ्रमित करना और नियम और शर्तों का हवाला देते हुए स्कूल में भर्ती करने में आनाकानी बरतना महंगा साबित होने वाला है। दिल्ली सरकार व शिक्षा निदेशालय द्वारा पहले से ही अपनाए गए कड़े रुख के क्रम में अब दिल्ली नगर निगम ने भी आस्तीनें चढ़ा ली हैं। यहां तक कि एमसीडी ने अपने अधीन क्षेत्रों में

उड़ीसा के केंद्रपाड़ा संसदीय क्षेत्र से बीजू जनता दल के सांसद व सुलझे हुए राजनेता बैजयंत (जय) पांडा ने थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों विशेषकर ‘स्कूल वाऊचर’ कार्यक्रम की जमकर तारीफ की है। श्री पांडा ने सीसीएस द्वारा विगत कई वर्षों से गरीब छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए चलाए जा रहे वाऊचर प्रोग्राम की सफलता और इसकी प्रभावशीलता की भी जमकर तारीफ। यहां तक कि उन्होंने देश के सभी राज्यों के सभी जिलों में ऐसे पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का भी सुझाव दिया। वह सीसीएस के चौथे वार्षिक ‘स्कूल च्वाइस ने

बॉलीवुड में ‘शो मैन’ के नाम से मशहूर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई का मानना है कि डॉक्युमेंटरी फिल्में अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं। जो मुद्दे मीडिया तक नहीं पहुंच पाते डॉक्युमेंटरी फिल्में उन्हें लोगों तक पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्युमेंटरी फिल्मों को यदि ठीक ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो यह कमर्शियल फिल्मों से ज्यादा पसंद की जाएंगी। शिक्षा के बाबत बोलते हुए सुभाष घई ने कहा कि आज देश को राइट टू एजुकेशन से ज्यादा राइट एजुकेशन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है कि विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी होने के बावजूद लोग बेरोजगार है। उन्होंने बेरोज

जाने माने उद्योगपति व एमफेसिस (बीपीओ) के संस्थापक जयतीर्थ राव ने देश में केंद्रीय योजना आयोग उपयोगिता को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा है कि देश में ऐसे किसी भी आयोग की कोई जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं जयतीर्थ राव ने योजना आयोग को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए कहा कि यदि यह आयोग नहीं होता तो देश आजादी के छह दशकों में वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक प्रगति कर चुका होता। राव प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्टी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्टी का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंक संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्

पूंजीवाद, बाजारवाद और पूर्ण प्रतियोगिता की अवधारणा ही एक ऐसा सिद्धांत है जिसे अपनाकर कोई भी देश एक साथ सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक समस्याओं सहित सभी समस्याओं से न केवल निजात पा सकता है बल्कि तरक्की और विकास के मार्ग पर भी अग्रसर हो सकता है। देश की तंगहाल आर्थिक स्थिति से निराश जनता और बाजार ने नब्बे की दशक में ऐसे अप्रत्याशित विकास को प्राप्त कर इसकी अनुभूति भी कर चुकी है। लेकिन वर्तमान समय में इरादतन अथवा गैर इरादतन ढंग से बाजार से प्रतियोगिता की स्थिति बनाने की बजाए इसे और हतोत्साहित किया जा रहा है जिसका परिणाम महंगाई, मुद्रा स्फिति आदि जैसी समस्याओं के रूप में हमारे साम

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