सीएजी

आज की भारतीय राजनीति राजनीतिज्ञों से कम और सुप्रीम कोर्ट और महा लेखा नियंत्रक (सीएजी)द्वारा ज्यादा संचालित हो रही है।इसका भारतीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब यह है कि हम भारत की संवैधानिक संस्थाओं द्वारा भ्रष्ट और बेरहम राज्य के खिलाफ बगावत देख रहे हैं। एक अंतर्निहित राजनीतिक साझिश यह सुनिश्चित करती है कि सभी राजनीतिक दल बड़े पैमाने पर ऱिश्वत और भाईभतीजावाद में बड़े पैमाने पर लिप्त  होते हैं। ऐसे माहौल में नतीजे केवल न्याय से नहीं वरन पैसे, बाहुबल और प्रभाव से तय होते हैं।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

कोयला खदानों के आबंटन को लेकर सीएजी की रपट संसद में पेश होने के बाद यूपीए सरकार कोयले की आंच में बुरीतरह  झुलस रही है। कोयले की दलाली में उसके केवल हाथ ही काले नहीं हुए वरन मुंह भी काला हुआ है।ऐसी छीछालेदार हो रही है कि ईमानदारी  के साक्षात अवतार माने जानेवाले प्रधानमंत्री भी कटघरे में खड़े हैं। वह भी छोटे –मोटे नहीं 1लाख 86 हजार करोड़ रूपये के । इस बार एक दिन में तीन सीएजी रपटे संसद में पेश हुई और सभी में सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर किया गया है।इसके बाद हर बार की तरह सरकार और विपक्ष के बीच आरोपों और प्रति आरोपों का शीतयुद्ध शुरू हो गया । लेकिन गंभीर बात यह है कि