साऊथ एशियन बाम्बू फाऊंडेशन

बांस के पेड़ की बजाए घास होने के तथ्य के वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित और संवैधानिक तौर पर स्वीकृत हो जाने के बावजूद नौकरशाही और पहले से जारी व्यवस्था के कारण अब तक इसे घास के रूप वैधानिक मान्यता नहीं मिल सकी है। जिसके कारण इसकी कटाई और व्यवसायिक प्रयोग की मनाही है। यदि इसे घास के रूप में पर्यावरण और वन मंत्रालय से वैधानिक मान्यता मिल जाती है तो देश में न केवल हरे वृक्षों की कटाई में कमी आएगी बल्कि इसके सहारे आजिविका कमाने वाले लाखों आदिवासियों व जंगल पर निर्भर जनजातियों को व्यवसाय भी उपलब्ध हो सकेगा। यहां तक कि स्वयं योजना आयोग का भी मानना है कि इससे 5 करोड़ लोगों के रोजगार