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अमेरिका में वॉलमार्ट कंपनी की लॉबिंग की रिपोर्ट पर भारतीय संसद में गतिरोध खड़ा करने वाली पार्टियों का मुद्दा क्या है, इसे सहजता से नहीं समझा जा सकता। अगर वॉलमार्ट या उसकी तरफ से लॉबिंग के लिए नियुक्त कंपनी ‘पैटन बॉग्स’ ने भारत में किसी को रिश्वत दी तो यह आपराधिक मामला होगा। लेकिन प्रारंभिक रूप से इसके कोई संकेत नहीं हैं। वैसे भी एक वकील ने यह मसला सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिया है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में उपलब्ध तमाम तथ्यों की रोशनी में अपना फैसला देगा।

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वित्तीय घाटे का विचित्र इलाज सार्वजनिक इकाइयों के शेयर बेचकर सरकार अपना वित्तीय घाटा पूरा करना चाहती है। सरकार की आमदनी कम हो और खर्च ज्यादा हो तो अंतर को वित्तीय घाटा कहा जाता है। वर्तमान में वित्तीय घाटा तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि खाद्य पदार्थो, डीजल एवं फर्टिलाइजर पर दी जा रही सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है। चिदंबरम की सोच है कि सरकारी कंपनियों के शेयर बेचकर इस घाटे की भरपाई कर ली जाए। पेंच है कि पूंजी प्राप्ति का उपयोग चालू खर्च के पोषण के लिए किया जाना है। पूंजी प्राप्ति में जमीन, शेयर, मकान, मशीन आदि की बिक्री आती है। जैसे प्रिंटिंग प्रेस का मालिक या पूर्व में खरीदे गए

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आर्थिक सुधारों के मद्देनजर एफडीआइ के फैसले ने विपक्ष को भले आक्रामक किया हो, लेकिन सरकार ने भी यह तय कर लिया है कि नहीं झुकेगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी साफ कह दिया है कि देश को वे 1991 की स्थिति में नहीं ले जाना चाहते। उनके इस बयान से सरकार का आत्मविश्वास भी झलक रहा है। तमाम विरोधों के बीच सरकार के बढ़ते कदम यह बताने के लिए काफी हैं कि उसके ऊपर इन विरोधों का कोई असर नहीं होने वाला। आर्थिक सुधार लागू करने के लिए सरकार तटस्थ है और वह करके रहेगी। जानकारों की मानें तो सरकार अभी और कई नए फैसले लेने वाली है, जो देश को हतप्रभ कर सकता है। रिटेल में एफडीआइ को मंजूरी दिए जान

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