सरकार

मुझे नहीं लगता कि यह कहना अतिश्योक्ति होगा कि हमारा इतिहास, महंगाई और मुद्रा स्फीति का इतिहास रहा है। वह मुद्रा स्फीति जिसका सृजन आम तौर पर सरकार द्वारा सरकार के फायदे के लिए किया गया..
 
- फ्रैडरिक ऑगस्ट वॉन हायक  
व्यवसाय में सरकारी "सहायता" उतना ही त्रासदीपूर्ण है जितना कि सरकारी "उत्पीड़न"...सरकार केवल एक ही तरीके से राष्ट्र की समृद्धि में अपना योगदान दे सकती है, और वह है स्वयं को इससे दूर रखना।
 
- आयन रैंड
जब भी वापस आती हूं वतन किसी विदेशी दौरे के बाद, तो कुछ दिनों के लिए मेरी नजर विदेशियों की नजरों जैसी हो जाती है। बिल्कुल वैसे, जैसे आमिर खान के नए टीवी इश्तिहार में दर्शाया गया है। मुझे भी जरूरत से ज्यादा दिखने लगती हैं भारत माता के 'सुजलाम, सुफलाम' चेहरे पर गंदगी के मुहांसे, गंदी आदतों की फुंसियां और गलत नीतियों के फोड़े।

पिछले तीन वर्षों से हमारी अर्थव्यवस्था संकट में है। विकास दर लगातार गिर रही है, महंगाई बढ़ती जा रही है और रुपया टूट रहा है। इन सभी समस्याओं की जड़ में कुशासन ही दिखाई देता है। महंगाई बढ़ने का कारण है सरकार द्वारा अपने राजस्व का लीकेज किया जाना। जैसे सरकार का राजस्व एक करोड़ रुपया हो और उसमें 20 लाख रुपये का रिसाव करके अफसरों और नेताओं ने सोना खरीद लिया हो। अब सरकार के पास वेतन आदि देने के लिए रकम नहीं बची। ये खर्चे पूरे करने के लिए सरकार ने बाजार से कर्ज लिए।

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