सब्सिडी

वह जादूगर क्या खूब करामाती था। उसने सवाल उछाला। कोई है जो बीता वक्त लौटा सके?..मजमे में सन्नाटा खिंच गया। जादूगर ने मेज से संप्रग सरकार के पिछले बजट उठाए और पढ़ना शुरू किया। भारी खर्च वाली स्कीमें, अभूतपूर्व घाटे! भीमकाय सब्सिडी बिल! किस्म किस्म के लाइसेंस परमिट राज!

प्रसेनजीत बोस मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के युवा नेता है । इसके अलावा  वे पार्टी की रिसर्च यूनिट के संयोजक हैं। पिछले दिनों सतीश पेडणेकर  ने उनसे बजट और देश की आर्थिक स्थिति पर बातचीत की । यहां उसके कुछ अंश प्रस्तुत हैं -

कभी बजट केवल बैलेंस आफ बुक ही नहीं होता था उससे देश की आर्थिक नीति की दिशा भी तय होती थी। क्या अब बजट का वह महत्व खत्म हो रहा है?

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