संपन्नता

"लेकिन हम सभी मुक्त अर्थव्यवस्था की ईच्छा रखते हैं... न केवल इसलिए कि यह हमारी स्वतंत्रता की गारंटी है, बल्कि इसलिए भी कि यह धन के सृजन का और पूरे देश को संपन्न बनाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है...।"

- मार्ग्रेट थैचर (1925-3013)

Category: 

 

जब ऐसा कहा गया है कि मानव (Home Economicus) धन पैदा करने के लिए तैयार किया गया एक यंत्र है, तो भारतीय अर्थशास्त्र में बताए जा रहे उस तर्क की जांच करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिसके अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या गरीबी का एक कारण है। यदि मनुष्य एक मात्र ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है, तो इसकी अधिक संख्या गरीबी का कारण कैसे हो सकती है? सच क्या है ?

यह महज संयोग ही है कि जिस समय म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की चालीस साल बाद भारत के दौरे पर थीं, ठीक उसी समय हमारे पड़ोस चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 18वीं कांग्रेस की बैठक का आयोजन किया जा रहा था। दुनियाभर में इस कांग्रेस पर सबकी निगाहें थीं। खासकर भारत के लिए तो एक पड़ोसी होने के नाते यह और भी अहम था। जहां बरसों की नजरबंदी के बाद रिहा हुई सू की लोकतंत्र की पड़ताल करने के लिए इन दिनों लोकतांत्रिक देशों का दौरा कर रही हैं, वहीं चीन में इन दिनों पिछले पचास साल से चले आ रहे माओवादी ढांचे को तोड़ने की छटपटाहट साफ नजर आ रही है।