संपत्ति का अधिकार

- फ्रेजर इंस्टिट्यूट व सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा जारी वैश्विक रैंकिंग में 102 से फिसलकर 112वें स्थान पर पहुंचा भारत
- आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में भूटान (78), नेपाल (108) व श्रीलंका (111) से पिछड़ा पर चीन (113), बांग्लादेश (121) व पाकिस्तान (133) से रहा आगे
- आर्थिक रूप से स्वतंत्र देशों की सूची में हांगकांग शीर्ष पर, सिंगापुर व न्यूजीलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर

ग्रामीण भारत में जल और जंगल दो सबसे ज्यादा मूल्यवान संसाधन हैं। लेकिन ये संसाधन इन इलाकों में रहने वाले लोगों के हाथ में नहीं हैं। ये राज्य के हाथ में हैं और राज्य ही इनका प्रबंधन करता है। जल और जंगल ग्रामीण समुदायों की बजाए देश की संपत्ति है। ये राष्ट्रीयकृत संसाधन हैं। इस राष्ट्रीयकरण ने ग्रामीणों को उनके बहुमूल्य आर्थिक संसाधन से वंचित कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक अन्याय है। 
 
हममें से अधिकांश लोग डा. भीमराव अंबेडकर को एक अधिवक्ता, दलित नेता और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार के तौर पर पहचानते हैं। लेकिन कम ही लोगों को पता है कि डा. अंबेडकर एक निपुण अर्थशास्त्री भी थे। उनके पास न केवल लॉ की डिग्री थी बल्कि उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से 1915 व 1927 में क्रमशः अर्थशास्त्र में एमए व पीएचडी भी की थी।