शौचालय

 

गांवों में मोबाइल गवर्नेंस की जरूरत

तेईस साल की राखी पालीवाल राजस्थान के राजसमंद जिले में उपली-ओदेन पंचायत की उप-प्रमुख हैं। वह एकमात्र निर्वाचित महिला सदस्य हैं, जो बाइक चलाती हैं। सुबह चार बजे उठकर खुले में शौच के खिलाफ महिलाओं को सलाह देती हैं। दिन में लॉ स्कूल जाती हैं और स्मार्ट फोन से फेसबुक अपडेट करती हैं।

सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा को लेकर जब भी हमारे देश में राज्य सरकारों से जबाव तलब किया जाता है तो उनका दावा होता है कि उनके यहां अब यह समस्या बिल्कुल नहीं। इस कुप्रथा का नामो निशान मिट गया है और इन सफाई कर्मियों का उन्होंने अपने यहां पूरी तरह पुनर्वास कर दिया है, लेकिन इन दावों में कितनी सच्चाई और कितना झूठ है, यह हाल ही में हमारे सामने निकलकर आया। साल 2011 की जनगणना के आंकड़े इन दावों की हवा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 50 फीसद भारतीय खुले में शौच को जाते हैं और 13 लाख ऐसे अस्वच्छ शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी साफ-सफाई का जिम्मा आज भी घोषित और अघोषित रूप से