शरद जोशी

वयोवृद्ध किसान नेता व शेतकारी संगठन के संस्थापक शरद जोशी का शनिवार, 12 दिसंबर को निधन हो गया। 2004 से 2010 तक राज्य सभा के सांसद रहे शरद जोशी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उनकी पहचान मझे अर्थशास्त्री, ब्यूरोक्रेट व राजनैतिक दल 'स्वतंत्र भारत पक्ष' के संस्थापक के तौर पर भी होती ह

एक राज्य का नया वित्तमंत्री काकभुशुण्डजी से मिलने गया और हाथ जोड़कर बोला कि मुझे शीघ्र ही बजट प्रस्तुत करना है, मुझे मार्गदर्शन दीजिए. तिस पर काकभुशुण्ड ने जो कहा सो निम्नलिखित है:
 

महाराष्ट्र में लंबे समय तक किसानों का बड़ा आंदोलन चलाने वाले शेतकारी संगठना के नेता शरद जोशी का कहना है कि यदि सरकार खेती में हस्तक्षेप बंद कर दे और किसानों को खुली मंडी में अपनी उपज बेचने दे तो न किसान आत्महत्या करेंगे और न बदहाल रहेंगे। राज्यसभा सदस्य श्री  जोशी से हरिभूमि के स्थानीय संपादक ओमकार चौधरी ने बातचीत की।

आजादी के इतने सालों बाद भी किसान बदहाल क्यों बना हुआ है?

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मराठी के लोकप्रिय अखबार लोकसत्ता के आयडिया एक्सचेंज में पिछले दिनों किसान नेता और उदारवादी चिंतक शरद जोशी को बुलाया गया था । इस कार्यक्रम में अखबार के संपादकीय विभाग के लोग मेहमान के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हैं। इस कार्यक्रम में शरद जोशी देश की कृषि की समस्याओं और उसके समाधान के बारे में विस्तार और बेबाकी के साथ अपने विचार रखे । हम लोकसत्ता से साभार इस बातचीत के अंश दो किश्तों में प्रकाशित कर रहे हैं। मराठी में हुई इस बातचीत का अनुवाद किया है – सतीश पेडणेकर ने। यहां प्रस्तुत है उसकी दूसरी किस्त -

मराठी के लोकप्रिय अखबार लोकसत्ता के आयडिया एक्सचेंज में पिछले दिनों किसान नेता और उदारवादी चिंतक शरद जोशी को बुलाया गया था । इस कार्यक्रम में अखबार के संपादकीय विभाग के लोग मेहमान के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हैं। इस कार्यक्रम में शरद जोशी देश की कृषि की समस्याओं और उसके समाधान के बारे में विस्तार और बेबाकी  के साथ  अपने विचार रखे । हम लोकसत्ता से साभार इस बातचीत के अंश दो किश्तों में प्रकाशित कर रहे हैं । मराठी में हुई इस बातचीत का अनुवाद किया है – सतीश पेडणेकर ने। यहां प्रस्तुत है उसकी पहली किस्त -

मार्च 2012 के संसद के बजट की शुरूआत परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई। अभिभाषण में राष्ट्रपति ने सबसे ज्यादा बल उनकी सरकार के अन्न सुरक्षा बिल को लागू करने  के उद्देश्य पर दिया । राष्ट्रपति का भाषण सारी सरकार के लिए मार्गदर्शक होता है। इसलिए बजट भाषण में प्रणवदा भी इस मुद्दे पर बल देते यह स्वाभाविक ही था। प्रणवदा ने कहा कि इसे  सरकार पारित करवाने के लिए  कृतसंकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा इससे अन्न उपलब्ध कराना  कानूनी बाध्यता  (–लीगल इंटायटलमेंट) बन जाएगा। लेकिन उनके भाषण से ऐसा नहीं लगा कि अन्न सुरक्षा  संवैधानिक या मौलिक