वॉलमार्ट

क्या आपने संसद के दोनों सदनों में इस हफ्ते किराना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर हुई बहस टेलीविजन पर देखी? यदि नहीं, तो कृपया लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही जरूर पढ़िए। आप पाएंगे कि हमारे नेताओं के शब्द खोखले हो गए हैं और विचार भोथरे। न उनके विरोध का कोई अर्थ है और न समर्थन पर कोई सार्थक तर्क.

अमेरिका में वॉलमार्ट कंपनी की लॉबिंग की रिपोर्ट पर भारतीय संसद में गतिरोध खड़ा करने वाली पार्टियों का मुद्दा क्या है, इसे सहजता से नहीं समझा जा सकता। अगर वॉलमार्ट या उसकी तरफ से लॉबिंग के लिए नियुक्त कंपनी ‘पैटन बॉग्स’ ने भारत में किसी को रिश्वत दी तो यह आपराधिक मामला होगा। लेकिन प्रारंभिक रूप से इसके कोई संकेत नहीं हैं। वैसे भी एक वकील ने यह मसला सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिया है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में उपलब्ध तमाम तथ्यों की रोशनी में अपना फैसला देगा।