वेतन

पिछले तीन वर्षों से हमारी अर्थव्यवस्था संकट में है। विकास दर लगातार गिर रही है, महंगाई बढ़ती जा रही है और रुपया टूट रहा है। इन सभी समस्याओं की जड़ में कुशासन ही दिखाई देता है। महंगाई बढ़ने का कारण है सरकार द्वारा अपने राजस्व का लीकेज किया जाना। जैसे सरकार का राजस्व एक करोड़ रुपया हो और उसमें 20 लाख रुपये का रिसाव करके अफसरों और नेताओं ने सोना खरीद लिया हो। अब सरकार के पास वेतन आदि देने के लिए रकम नहीं बची। ये खर्चे पूरे करने के लिए सरकार ने बाजार से कर्ज लिए।

 
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शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को लागू हुए आज तीन वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर देश भर में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर बेहतर शिक्षा, स्कूलों व अध्यापकों की गुणवत्ता आदि पर ढेरों बातें हुईं। अधिकांश चर्चाओं परिचर्चाओं का मुख्य केंद्र सरकार द्वारा इस मद में खर्च की जाने वाली धनराशि, सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति व स्कूलों में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुए दाखिलों की बातें ही रहीं। छात्रों को किस प्रकार के कमरों में पढ़ाया जाए? स्कूल का आकार कम से कम कितने क्षेत्र में फैला होना चाहिए? कक्षा में अधिकतम छात्र कितने होने चाहिए? मिड डे मिल का मेन्यू क्या हो ताकि छात