विपक्ष

यह देखना दयनीय है कि करीब-करीब हर मुद्दे पर मतभेद रखने वाले हमारे राजनीतिक दल इस पर एकजुट हैं कि राजनीतिक दलों को सूचना अधिकार कानून से बाहर रखा जाए। यह एकजुटता कितनी जोरदार है, इसका पता सूचना अधिकार कानून में संशोधन लाने के लिए पेश किए गए विधेयक से चलता है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि हमारे राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थो के लिए उस कानून को बदलने यानी कमजोर करने जा रहे हैं जिसे स्वतंत्रता के बाद सबसे प्रभावी कानूनों में से एक की संज्ञा दी गई है।

अमेरिका में वॉलमार्ट कंपनी की लॉबिंग की रिपोर्ट पर भारतीय संसद में गतिरोध खड़ा करने वाली पार्टियों का मुद्दा क्या है, इसे सहजता से नहीं समझा जा सकता। अगर वॉलमार्ट या उसकी तरफ से लॉबिंग के लिए नियुक्त कंपनी ‘पैटन बॉग्स’ ने भारत में किसी को रिश्वत दी तो यह आपराधिक मामला होगा। लेकिन प्रारंभिक रूप से इसके कोई संकेत नहीं हैं। वैसे भी एक वकील ने यह मसला सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिया है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में उपलब्ध तमाम तथ्यों की रोशनी में अपना फैसला देगा।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंदी की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ रही है। आर्थिक विकास के दर का अध्ययन करने वाली तमाम संस्थाएं दुनियाभर में मंदी को आसन्न मान रहीं हैं। प्रतिक्रिया स्वरूप सबसे पहले अमेरिका जैसे देश ने अपनी अर्थव्यवस्था को मंदी से अप्रभावित रखने और व्यवसायियों को फौरी राहत देने के तौर पर संरक्षणवाद का लबादा ओढ़ना शुरू कर दिया है। पहले से ही कर्ज के संकट में घिरे यूरोप और उसके बाद जापान, चीन और भारत में आर्थिक विकास की धीमी पड़ती रफ्तार, मंदी के अंदेशे को हवा देने के लिए काफी है।