विनिमय

अगर आप जमीन की तरफ ही देखते रहें तो आपको इंद्रधनुष कभी नहीं दिखेगा। भारतीय वित्तीय बाजार अब चार्ली चैपलिन के इस सूत्र को मंत्र की तरह जप रहा है। पिछले तीन सालों में यह पहला वर्षात है जब भारत के बाजार यंत्रणाएं भूलकर एकमुश्त उम्मीदों के साथ नए साल की तरफ बढ़ रहे हैं। सियासी अस्थिरता और ऊंची ब्याज दरों के बीच बल्लियों उछलते शेयर बाजार की यह सांता क्लाजी मुद्रा अटपटी भले ही हो, लेकिन बाजारों के ताजा जोशो खरोश की पड़ताल आश्वस्त करती है कि किंतु-परंतु के बावजूद उम्मीदों का यह सूचकांक आर्थिक-राजनीतिक बदलाव के कुछ ठोस तथ्यों पर आधारित है।

"मुक्त बाजार पूंजीवाद, मुक्त और स्वेच्छा से किए जाने वाले विनिमय (आदान प्रदान) का एक ऐसा संजाल (नेटवर्क) है, जिसमें उत्पादक कार्य करते हैं, उत्पादन करते हैं और स्वैच्छिक रूप से तय हुई कीमत पर अपने अपने उत्पादों का एक दूसरे के साथ परस्पर विनिमय करते हैं..।"

- मर्रे रॉथबार्ड