विदेशी पूंजी

हाल ही में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम थकाऊ विदेश दौरे से वापस लौटे हैं, जहां उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर पेश करते हुए मौजूदा और संभावित निवेशकों को भारत के प्रति लुभाते हुए कहा कि भारत व्यापार के लिए आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने रेटिंग एजेंसियों को भी लुभाने का प्रयास किया कि कहीं वे भारत की रेटिंग न गिरा दें। वह अपने मकसद में कितने कामयाब हुए यह तो आने वाले महीनों में ही पता चलेगा जब उनके मंत्रालय को अगले आम चुनाव की तैयारियों के तहत लोकप्रिय राजनीति का बोझ उठाना पड़ेगा।

(स्वतंत्र पार्टी के नेता मीनू मसानी द्वारा 3मई 1966 को लोकसभा में दिए गए भाषण का एक अंश)

मैं इस बात चिंतित हूं कि इस बजट में विदेशियों  के कंधों पर इस देश के विकास का बोझ किस हद तक डालने की कोशिश की गई है।मोटे तौरपर भारत तीसरी पंच वर्षीय योजना की तुलना में चौथी पंचवर्षीय योजना के लिए 75 प्रतिशत ज्यादा सरकारी मदद मांग रहा है।यदि सरकार की इच्छाएं पूरी हुईं तो  कुल आर्थिक मदद में अमेरिका और विश्वबैंक का हिस्सा दो तिहाई से बढ़कर तीन चौथाई हो जाएगा।