वामपंथी

 

गरीबी बड़ी भयानक चीज है। कुछ ही चीजें हैं जो मानवता को इतना नीचा देखने पर मजबूर करें और जीवन की बुनियादी जरूरतें भी पूरी न कर पाना उनमें से एक है।

भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें गरीबी का स्वर्ग कहा जा सकता है। हम चाहे तो 1947 के पहले की हमारी सारी गलतियों के लिए अंग्रेजों को दोष दे सकते हैं, लेकिन उन्हें गए भी 67 साल गुजर चुके हैं। हम अब भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में से हैं। एशिया में चालीस के दशक में हमारे बराबर गरीबी के साथ शुरुआत करने वाले देशों ने कितनी तरक्की कर ली है।

जब सरकारी जूता जनता के गर्दन पर होता है तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि जूता बायां है या दांया... - अज्ञात
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पी चिदंबरम साहब से एक सवाल पूछने का मौका मिलता मुझे, तो मेरा उनसे यह सवाल होता- भारत का कारवां क्यों लुटा? यह सवाल मैंने चुराया है एक मशहूर शेर से, जो कुछ इस तरह है, तू इधर-उधर की न बात कर, यह बता कारवां क्यों लुटा? वित्त मंत्री के लिए यह इसलिए मुनासिब है, क्योंकि वह उस सरकार में मंत्री हैं, जिसके शासनकाल में इतना नुकसान पहुंचाया गया है इस गरीब देश की अर्थव्यवस्था को कि जीडीपी (वार्षिक वृद्धि दर), जो कुछ वर्ष पहले दौड़ रही थी नौ फीसदी की रफ्तार से, पिछले वर्ष गिरकर पांच फीसदी तक पहुंच गई है।