लक्ष्मीजी

बिरला हो या टाटा ,अंबानी हो या बाटा
सबने अपने चक्कर में देश को है काटा
अरे हमरे ही तो खून से इनका
इंजिन चले धकाधक
आमआदमी की जेब हो गई है सफाचट