योजना आयोग

सरकार भले ही आठ फीसद विकास दर हासिल करने के तमाम प्रयास करे मगर निजी क्षेत्र के निवेश के बिना यह संभव नहीं है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने कहा है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर एक खरब डॉलर खर्च करने का लक्ष्य है। मगर इसका आधा हिस्सा यानी 500 अरब डॉलर निजी निवेश से आना चाहिए। इसके बगैर अर्थव्यवस्था तेजी से नहीं दौड़ पाएगी। वे सोमवार को यहां उद्योग संगठन फिक्की के एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

अप्रैल 2012 से देश में लागू हो चुकी बारहवीं पंचवर्षीय योजना में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निजी सरकारी साझेदारी के तहत सुधार की संभावनाएं तलाशने की योजना को कम्प्यूटरीकरण के बाद स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े क्रांतिकारी पहल के तौर पर देखा जाना चाहिए। इससे न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधारात्मक प्रयासों को बल मिलेगा बल्कि देश की मेधा को वांछित स्वरूप भी प्राप्त होगा। देखा जाए तो आजादी के बाद देश ने रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में तो काफी विकास किया लेकिन स्वास्थ्य व शिक्षा के मामले यह फिसड्डी ही रहा। रक्षा के क्षेत्र में विकास तो भारी भरकम बजट

जाने माने उद्योगपति व एमफेसिस (बीपीओ) के संस्थापक जयतीर्थ राव ने देश में केंद्रीय योजना आयोग उपयोगिता को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा है कि देश में ऐसे किसी भी आयोग की कोई जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं जयतीर्थ राव ने योजना आयोग को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए कहा कि यदि यह आयोग नहीं होता तो देश आजादी के छह दशकों में वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक प्रगति कर चुका होता। राव प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्टी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्टी का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंक संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्