योजनाएं

मेरे लेख अगर आपने एक बार से ज्यादा पढ़े हैं तो आप जान गए होंगे कि गैरसरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ के लोगों को मैं हमेशा शक की नजरों से देखती हूं। कारण यह कि दशकों लंबे पत्रकारिता जीवन में मेरी भेंट कई एनजीओ के लोगों से हुई है और अक्सर एक-दो मुलाकातों के बाद मैंने पाया है कि ये लोग धोखाधड़ी के उस्ताद होते हैं। जो थोड़े-बहुत शुरू में शरीफ दिखते हैं उनका भी असली रूप तब सामने आया है जब मैंने उनकी आदमनी के बारे में सवाल किए हैं। कहां से आता है पैसा रोज एक नए शहर में नए मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने का? कैसे निकल पड़ते हैं ये गरीबों के ठेकेदार विदेशी यात्राओं पर हर दूसरे महीने?