मुफ्त

"यदि आप ऐसे राजनेताओं को वोट देते आ रहे हैं जो आपको मुफ्त (दूसरों के खर्च पर) चीजें देने का वादा करते हैं, तब जब वे आपके पैसे से स्वयं सहित दूसरों को चीजें बांटते हैं, आपके पास शिकायत करने का अधिकार नहीं रह जाता है"

- थॉमस सोवेल

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो जाने के बाद अब सारी लड़ाई राजस्थान और दिल्ली में केंद्रित हो गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान की घड़ी करीब आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं जहां मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच है। स्वाभाविक रूप से दोनों दलों के प्रमुख नेता एक के बाद एक चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं और इस प्रकार की रैलियों को सफल दिखाने के लिए उनमें लोगों की भीड़ जुटाने के ल

कई विद्वानों का मानना है कि भारतवासी भारत में रहकर वैसी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते, जो विदेशों में पहुंचते ही उनको नसीब हो जाती है। इस बार न्यूयॉर्क में मुझे इस बात की सच्चाई का गहरा एहसास हुआ। जिस दिन यहां पहुंची एक पारसी दोस्त की बेटी की शादी में कानक्टीकट जाना हुआ और रास्ते में पता चला कि गाड़ी का ड्राइवर देसी था।

खाद्य सुरक्षा गारंटी अध्यादेश से सस्ते अनाज की आस लगाए बैठे लोगों पर अब दोहरी मार पड़ रही है। पूर्व की तुलना में समान मात्रा में अनाज पाने के लिए अब उन्हें दो से तीन गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। यह सब हो रहा है सरकार द्वारा मुफ्त अथवा लगभग मुफ्त प्रदान करने के नाम पर। इस सरकारी गुणा-गणित से अंजान मुफ्त में सबकुछ पाने की आस लगाए बैठे लोगों को अब शायद कुछ सदबुद्धि प्राप्त हो। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें...