मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार घोषणापत्र 1948 के अनुच्छेद 26 शिक्षा से संबंधित है जिसकी तीन धाराएं हैं। पहला, निशुल्क एवं आवश्यक प्राथमिक शिक्षा से संबंधित है तो दूसरा शिक्षा के उद्देश्यों (समझ को बढ़ावा देने, सहनशीलता, सभी राष्ट्रों, जाति व धार्मिक समूहों के साथ मित्रता) की स्थापना करता है। तीसरी धारा अभिभावकों को अपने बच्चों को दिए जाने वाली शिक्षा के प्रकार को चुनने पूर्वाधिकार की बात कहता है। अभिभावकों के चुनने का विचार शिक्षा के अधिकार (आरटीई) एक प्रमुख घटक रहा है, लेकिन भारत में शिक्षा के सुधार को लेकर होने वाली बहसों में शायद ही इस पर कभी चर्चा होती है।  

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी ने दैनिक जागरण की ओर से उठाए गए सवालों के जैसे जवाब दिए हैं उनसे यह और अच्छे से साबित हो रहा है कि नक्सली नेता वैचारिक रूप से बुरी तरह पथभ्रष्ट हो चुके हैं और वे अपनी ही बनाई दुनिया में रह रहे हैं। वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त कर न केवल सत्ता हथियाने का मंसूबा पाले हुए हैं, बल्कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने सत्ता संचालन का अधिकार वैधानिक तरीके से अर्जित कर लिया है। यदि वे इस खुशफहमी में नहीं होते तो सगर्व यह नहीं कह रहे होते कि फिरौती-उगाही करना इसलिए जायज है, क्योंकि उन्हें इतने बड़े तंत्र को चलाना पड़ रहा है। वे जिसे अ