माडल

गुजरात ने इस दलील को गलत साबित कर दिया है कि लोगों को कम दाम में बिजली चाहिए होती है और वह ज्यादा दामों का भुगतान नहीं करना चाहते। गुजरात का अनुभव बताता है कि लोग भुगतान करने को तैयार होते हैं बशर्ते बिजली सप्लाई बेहतर हो। यह ज्योतिग्राम योजना के साथ भी हुआ है। एक बार जब बिजली पूर्व निर्धारित समय पर उपलब्ध हो जाती है तो कृषि के लिए मिलनेवाली सब्सिडाइज्ड रेटवाली बिजली को घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति कम हो गई है। ज्योतिग्राम योजना ने बिजली के ट्रांसमिशन और वितरण के दौरान होनेवाले नुक्सानों को कम किया है। उसने ट्रांसफारमर खराबी घटनाओं को कम करने में  भी म

वैसे मोदी के विकास माडल पर सवाल खड़े करनेवालों की कोई कमी नहीं है। उनकी सबसे बड़ी दलील यह है कि गुजरात में विकास कोई नई बात नहीं है मोदी से पहले के दो दशकों में भी अन्य मुख्यमंत्रियों के शासन में भी तेजी से विकास हुआ इसलिए केवल मोदी को विकास का श्रेय नहीं दिया जा सकता। दूसरा मोदी गुजरात के विकास की बात करते हैं लेकिन उस कालखंड में सारे देश में तेजी से विकास हो रहा था इसलिए देश का हिस्सा होने के कारण गुजरात में भी विकास हुआ इसलिए इसमें कुछ खास और कुछ अनूटा नहीं है। फिर मोदी जिस उच्च विकास दर की बात करते हैं वह तो इस कालखंड में कई और राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार ने

विकास, विकास और विकास यही है गुजरात में नरेंद्र मोदी की तीसरी बार शानदार जीत का राज – ऐसा बहुत सारे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। बात कुछ हद सही भी है क्योंकि इस बार गुजरात विधानसभा के चुनावों में नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया गुजरात का विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा था जिस पर काफी तीखी बहस भी हुई। एक तरफ नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक थे जो  गुजरात के असाधारण विकास का पुरजोर दावा कर रहे थे। उनकी नजर में गुजरात ने जो विकास किया है वह सारे देश के लिए एक माडल एक मिसाल बन सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तथा कुछ सेकुलर कहलानेवाले संगठन मोदी के विकास पर सवालिया ख