मसले

इस वक्त दुनिया के दो बड़े देशों चीन और अमेरिका में बेरोजगारी, विकास, विदेश नीति, व्यक्तिगत छवि आदि बहस में बने हुए हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हो चुके हैं जिनमें बराक ओबामा को एक बार फिर जीत हासिल हुई है जबकि चीन सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।  हमारे देश से उलट दोनों ही जगहों पर 'भ्रष्टाचार' कोई मुद्दा ही नहीं है। आप पूछेंगे कि ऐसा हो भी क्यों? आखिर क्या हमें यह नहीं बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के पैमाने के लिहाज से भारत को विशिष्ट दर्जा प्राप्त है? कि भारत इस समय पहले की तुलना में कहीं अधिक भ्रष्ट है?