मल्टी ब्रांड रिटेल

जब भी दिल्ली में आम उपभोक्ता सब्जियों की महंगाई को लेकर हायतौबा मचाते हैं तो अक्सर सरकार राजधानी की सबसे बड़ी थोक मंडी आजादपुर में खरीदी जाने वाली सब्जियों के थोक भावों का विज्ञापन छपवाती है। पिछले कई सालों से इन विज्ञापनों को जिन्होंने भी देखा है, वे जानते हैं कि इनसे साफ पता चलता है कि आज तक किसान को कभी भी पालक के लिए 10 रुपये किलो का रेट नहीं मिला। बथुआ, गोभी कभी भी सीजन में 10 रुपये किलो से ऊपर यहां किसानों से नहीं खरीदी गई। मूली के भाव सुनकर तो लगता है, जैसे हम रामराज में जी रहे हों। डेढ़ रुपये, दो रुपये किलो अक्सर मूली बिकती है।

बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) विकास का रास्ता है जिसके माध्यम से सरकार छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, किसानों और युवाओं के हितों का पोषण करना चाहती है।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ऐसे भावुक भाषण देती हैं, मानो इस निर्णय से सब कुछ समाप्त हो जाएगा। लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। विपक्ष का ध्यान कुर्सी पर, हमारा जनता क भलाई पर है। शर्म की बात है कि सुषमा जी सूदखोरों का समर्थन कर रही हैं।