मनमोहन

जिस दिन सरकार ने डीजल के दाम बढ़ाए, मैंने बड़े ध्यान से ‘आम आदमी’ की प्रतिक्रिया टीवी के समाचार चैनलों पर सुनी। सुनने के बाद इस निर्णय पर पहुंची हूं कि सोनिया-मनमोहन सरकार की सबसे बड़ी गलती अगर है, तो वह यह कि उन्होंने जनता को कभी नहीं बताया कि आर्थिक सुधार अनिवार्य क्यों हो गए थे। इस देश के आम आदमी को 1991 में नहीं बताया कि अगर वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने उस समय आर्थिक दिशा न बदली होती, तो संभव है कि कंगाली की नौबत आ जाती। यह नहीं बताया कभी कि पिछले दो दशक में जो खुशहाली भारत में फैली वह मुमकिन न होती अगर अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि तीन फीसद से बढ़ कर नौ फीसद तक न पहुं

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब वित्तमंत्री भी बन गए हैं। उनका वित्तमंत्री के रूप में पहला कार्यकाल(1991-96) आर्थिक सुधार का महत्वपूर्ण कालखंड़ था जिसने भारत को अंतर्राष्ट्रीय भिखारी से संभावित महाशक्ति में बदल दिया। क्या मनमोहन सिंह के वित्तमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल में भी वैसे ही साहसिक सुधार देखने को मिलेंगे?

इसके आसार नहीं हैं। मनमोहन सिंह आठ वर्ष तक प्रधानमंत्री के तौरपर बिल्कुल शक्तिहीन रहे हैं। यह सब उनके वित्तमंत्री बनने के बाद बदल नहीं जाएगा क्योंकि वास्तविक सत्ता तो सोनिया गांधी के हाथों में है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर