भारतीय

क्या आपने संसद के दोनों सदनों में इस हफ्ते किराना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर हुई बहस टेलीविजन पर देखी? यदि नहीं, तो कृपया लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही जरूर पढ़िए। आप पाएंगे कि हमारे नेताओं के शब्द खोखले हो गए हैं और विचार भोथरे। न उनके विरोध का कोई अर्थ है और न समर्थन पर कोई सार्थक तर्क.

उम्मीद है कि ज्यादातर सुधारवादी नए रेल मंत्री पवन कुमार बंसल की प्रशंसा करने से नहीं चूकेंगे। रेल भवन में पदभार संभालने के बाद पहले ही दिन बंसल ने यात्री भाड़ा बढ़ाने की पैरवी की और कहा कि इसके बिना भारतीय रेल वित्तीय संकट में घिर जाएगी।