बैंगलोर

सोशल मीडिया की उपयोगिता के सैकड़ों आयाम हैं। यह उपयोगिता जब किसी को न्याय दिलाने या जीवन बचाने के मामले में दिखाई देती है, तो स्वाभाविक तौर पर इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा एक मामला बेंगलूर में दो दिन पहले सामने आया। पुलिस ने फेसबुक के जरिए दो सड़कछाप मवालियों को धर दबोचा। मामले की शुरुआत चंद दिनों पहले हुई थी, जब युवा अक्षय को अपनी दो महिला मित्रों के साथ सड़क पर दो लड़कों की बदतमीजी से जूझना पड़ा। बाइक सवार दो बदमाश महिलाओं से छेड़खानी कर भाग गए। इस दौरान अक्षय ने अपने मोबाइल से उनकी तस्वीरें ले लीं और फेसबुक पर पोस्ट कर दिया।

बारिश आई नहीं कि हमारे शहरों के बखिए उधडऩे लगते हैं। ताशमहल की तरह ढहते पुराने या निर्माणाधीन (अक्सर अवैध) नए मकान, बदहाल सड़कें, जलभराव से अदृश्य बने फुटपाथ, वाहन चालकों के दु:स्वप्न बने सड़कों पर बिछे जर्जर जड़ों वाले उखड़े पेड़, ट्रैफिक जाम और बिना ढक्कन वाले मेनहोलों से भलभलाकर सड़क पर उफनाते शहरी नाले; यह आज मानसूनी महीनों के दौरान देश के तकरीबन हर बड़े शहर का नजारा है। फिर गर्मी आई तो बिजली, पानी की कमी और बीमारियों का प्रकोप चालू हुआ। जब-जब इस बदहाली के दोष का विभिन्न राजनेताओं के बीच बंटवारा होने लगता है, तब-तब कहा जाने लगता है कि हमारा दोष नहीं, अमुक ने