बेरोजगारी

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो जाने के बाद अब सारी लड़ाई राजस्थान और दिल्ली में केंद्रित हो गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान की घड़ी करीब आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं जहां मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच है। स्वाभाविक रूप से दोनों दलों के प्रमुख नेता एक के बाद एक चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं और इस प्रकार की रैलियों को सफल दिखाने के लिए उनमें लोगों की भीड़ जुटाने के ल

बीते 16-17 जून की रात उत्तराखंड में हुए जलप्लावन और जनधन की अपार क्षति के बाद एक बार फिर से पहाड़ों पर निर्माण और विकास कार्यों की सार्थकता और आवश्यकता पर पर्यावरणविदों व भूगर्भविज्ञानियों के बीच बहस तेज हो गई है। अचानक से ही पहाड़ों को तोड़ने के लिए विस्फोटकों के हुए प्रयोग की मात्रा का हिसाब किताब ढूंढ ढूंढकर निकाला जाया जाने लगा है। टिहरी बांध के साथ ही साथ होटलों, रिजॉर्टो के निर्माण कार्यों की एक सुर में आलोचना की जाने लगी है। कारपोरेट्स, उद्योग जगत व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित लोगों द्वारा उन्हें विनाश का पुरोधा बताया जाना तो अवश

खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर इन दिनों देश में बहस का दौर जारी है। इससे ग्राहकों, स्थानीय खुदरा कारोबारियों और खुदरा कारोबार के वैश्विक दिग्गजों के हित जुड़े हों तो बहस होना स्वाभाविक ही है। पिछले कई साल से इस पर बातचीत जारी है लेकिन इस दौरान कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। फिलहाल औद्योगिक नीति एवं संवद्र्घन विभाग (डीआईपीपी) ने एफडीआई से जुड़े जिन व्यापक मुद्दों पर चर्चा पत्र पेश किया है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। इसके जरिये विभाग ने सभी अंशधारकों का पक्ष जानने की कोशिश की है।

मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत के बाद बवंडर सा मचा हुआ है। इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत होने पर अलग बवाल है। दो एकदम विपरीत ध्रुवों की राय सामने आ रही है। सरकारी पक्ष कह रहा है कि विदेशी निवेश आने से रोजगार बढ़ जायेगा, उपभोक्ताओं का भला होगा। कोल्ड स्टोरेज बनेंगे। फल अन्न की बरबादी रुकेगी। सरकार विरोधी पक्ष का कहना है कि भारत तबाह हो जायेगा, रोजगार खत्म हो जायेंगे। उपभोक्ता लुट जायेंगे। दोनों ही अतिवादी दृष्टिकोण हैं, रास्ता कहीं बीच से होकर जाता है।

खुदरा व्यवसाय देश में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा उद्योग है। यह खेती के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता क्षेत्र भी है। देश की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत और रोजगार के अवसर प्रदान करने में 6-7 प्रतिशत हिस्सेदारी खुदरा व्यवसाय की है। लगभग डेढ करोड़ रिटेल आऊटलेट्स के साथ भारत विश्व में सबसे ज्यादा आऊटलेट्स घनत्व वाला देश है। चाहे असंगठित रूप से एक परिवार द्वारा छोटे स्तर पर किया जाने वाले खुदरा व्यवसाय के स्वरूप में हो अथवा संगठित रूप में पिछले दस वर्षों में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण विकास का साक्षी बना है। उदारवादी अर्थ व्यवस्था, प्रतिव्यक्ति आय और उपभोक्तावाद में वृद्धि ने बड