बिजली की दरें

राजनैतिक हितों व वोट बैंक के स्वार्थ के वशीभूत हो सियासी दलों द्वारा निजीकरण, मुक्त बाजार व पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति की चाहे जितनी अनदेखी व आलोचना की जाए। लेकिन वास्तविकता यही है कि महंगाई की समस्या का समाधान किसी सरकार के पास नहीं बल्कि स्वयं बाजार के पास ही होता है। यदि बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति हो तो वस्तुओं/सेवाओं की कीमतों में उतरोत्तर कमी व गुणवत्ता में तुलनात्मक रूप से वृद्धि देखने को मिलती है। अर्थशास्त्र के इस सामान्य से नियम की न केवल अनदेखी की जाती है बल्कि लोगों के मन में बाजार को लेकर भ्रम भी पैदा किया जाता है।