बहुराष्ट्रीय कंपनियां

खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर बहस अंततः समाप्त हो गई। उम्मीद है कि अब इसने उन अन्य गरमागरम बहसों की आत्माओं के बीच अपनी शांतिपूर्ण जगह बना ली होगी, जिनसे हमारा लोकतांत्रिक देश यदा कदा गुजरता रहता है। हर समय लगता है मानो यह हमारे जीवन मरण का मुद्दा हो और हम विनाश के कगार पर खड़ें हों। अगर आप उनमें से हैं, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के विरोधियों द्वारा की गई बर्बादी की भविष्यवाणियों से डरते हैं तो यहां प्रस्तुत है इसी तरह की पहले हुई कुछ बहसों का छोटा सा इतिहास। यह बताने के लिए कि लाखों भारतीय नौकरी से निकालकर फेंक नहीं दिए जाएंगे। और भारत वॉलमार्ट या टेस्को का उपनिवेश

लघु, सूक्ष्म और मझोले उद्योगों के नए मंत्री वयलार रवि ने हाल ही में कहा कि अगर स्वीडन की रिटेल कंपनी आइकिया के देश में आने से स्थानीय छोटी और सूक्ष्म इकाइयों पर असर पड़ेगा तो इस विदेशी कंपनी के लिए नियमों में बदलाव नहीं किया जाएगा। आइकिया अगले 10 से 15 सालों में देश में 1.5 अरब यूरो (10,500 करोड़ रुपये) का निवेश करने को तैयार है, बशर्ते सरकार एकल ब्रांड खुदरा में विदेशी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में रियायत बरतने को तैयार हो। आइकिया जैसी रिटेल कंपनियों के लिए अपने माल का 30 फीसदी भारत की छोटी कंपनियों (जिनका कारोबार 5 करोड़ रुपये से कम का हो) से खरीदना अनिवार्य है