बहस

हम गरीब क्यों हैं? हमारा मुल्क विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां दुनिया के ज्यादातर गरीब भी बसते हैं। लिहाजा कोई भी व्यक्ति यही सोचेगा कि यह सवाल ही हर राजनीतिक बहस के केंद्र में होगा। वह यह भी सोच सकता है कि हम इस तरह के विषयों पर गहन व दिलचस्प बहस-परिचर्चाएं करते होंगे कि गरीबी के क्या कारण हैं ? अमीर बनने के लिए देश के तौर पर हम क्या कर सकते हैं ? तथा दुनिया के बाकी हिस्सों में इस दिशा में क्या कारगर कदम उठाए जा रहे हैं ?

हमारी संसद के साठ साल पूरे हो गये हैं। इतने वर्ष के सफर में एक तरफ देश में लोकतंत्र मजबूत हुआ है तो दूसरी तरफ उसके सभी उपकरण अपने अंर्तकलह से कमजोर हुए हैं। संसदीय लोकतंत्र की राजनीतिक प्रणाली दलीय प्रणाली पर चलती है जो हमारे देश में छिन्न भिन्न हो गई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में जवाहरलाल नेहरू के रहते हुए एक लंबी बहस की परंपरा डाली गई थी। संसदीय व्यवस्था में नेहरू के समय में प्रधानमंत्री, पक्ष, विपक्ष सभी बहस करते थे। उनके बाद इंदिरा जी ने ये परंपराएं रोक दीं। अब तो कांग्रेस भी लोकतांत्रिक पार्टी नहीं रह गई है। आज विपक्षी पार