बच्चे

दुनियाभर के माओवादियों का मानना है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है।लेकिन शायद माओवादी नेताओं को बंदूक थमाने के लिए पर्याप्त बालिग शूरमा नहीं मिल रहे हैं इसलिए वेबच्चों को बंदूक थमाकर सत्ता पाना चाहते हैं।लेकिन दुर्भाग्य से माओवादी प्रभावित  इलाकों में  जिन बच्चों को इस उम्र में स्कूल में होना चाहिए था वे वे माओवादी क्रांतियुद्ध के सैनिक बनकर क्रांतियुद्ध लड़ रहे हैं।खेलने कूदने और ढ़ने लिखने की  उम्र में उनमें से कई खूंख्वार और दुस्साहसी बन चुके हैं।