प्रतिबंध

भारत जैसे आजाद मुल्क में इन दिनों ‘बैन’ यानी ‘प्रतिबंध’ शब्द अखबारों और समाचार चैनलों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. आम तौर पर प्रतिबंध का नाम सुनते ही किसी ‘कठमुल्ला’ और उसके उल-जुलूल फतवे का ध्यान आता है, मगर हमारे देश में इन दिनों सेंसर बोर्ड (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) और प्रतिबंध एक दूसरे का पर्याय बनते नजर आ रहे हैं.

विगत कुछ समय से पंजाब में ड्रग्स के सेवन करने वालों की संख्या में हुई वृद्धि ने शासन प्रशासन सहित स्थानीय जनता के माथे पर चिंता की लकीरें पैदा कर दी है। तमाम प्रयासों के बावजूद वहां ड्रग्स का सेवन करने वालों की संख्या में कमी नहीं आ पायी है। यहां तक कि देशभर में पिछली कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल खड़ा करने में सफल रही भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। यह घटना बताने के लिए काफी थी कि लोगों के लिए यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण था।

सर्वेक्षण पर सवाल

जनमत सर्वेक्षणों पर कांग्रेस की आपत्ति निराधार नहीं कही जा सकती, लेकिन वह जिस तरह उन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रही है उससे उसके इरादों को लेकर संदेह पैदा होता है। क्या वह इसलिए जनमत सर्वेक्षणों के खिलाफ खड़ी हो गई है, क्योंकि हाल के ऐसे सर्वेक्षणों में उसकी हालत पतली होती दिखाई गई है? पता नहीं सच क्या है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पिछले कुछ समय से अपने आलोचकों के प्रति कुछ ज्यादा ही सख्त तेवर अपनाती दिख रही है।

देश की आर्थिक राजधानी व बड़े महानगरों में एक मुंबई को अन्य महानगरों की तुलना में मानसिक रूप से अधिक खुला और महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है। महाराष्ट्र के लोग भी प्रदेश की अन्य विशेषताओं के साथ-साथ अजंता और ऐलोरा की गुफाओं और उसकी चित्रकला व शिल्पकला पर भी बड़ा फक्र करते हैं। अजंता और ऐलोरा की ये वही गुफाएं हैं जिनमें प्रदर्शित नग्न और अर्द्धनग्न चित्रकलाओं और शिल्पकलाओं को सदियों से कला के उत्कृष्ट नमूने के तौर पर देखा गया है। यहां तक कि अधिकांश चित्रों और शिल्पों की छवियों को वात्स्यायन के कामसूत्र में कामकलाओं की सटीक व्याख्या करने के लिए भी उपयोग

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