पैसे

समाजवाद के 6 चमत्कार

1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
3- पैसे सभी को मिलते हैं, लेकिन इस पैसे से खरीदने के लिए कुछ भी नहीं होता
4- कोई कुछ नहीं खरीद सकता, लेकिन सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है
5- सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है, लेकिन कोई संतुष्ट नहीं होता
6- कोई संतुष्ट नहीं होता, लेकिन 99% लोग सिस्टम के लिए मतदान करते हैं

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चुनाव में बडे पैमाने पर पैसा खर्च करना केवल भारत की विशेषता नहीं है। अमेरिका ने हाल के चुनाव पर 7 बिलियन डालर खर्च किए जो 2008 के 5बिलियन डालर से ज्यादा है। इनमें से आधे राष्ट्रपति चुनाव और आधे कांग्रेस के चुनाव में खर्च हुए।इसके बावजूद नतीजे बताते हैं कि भारी चुनावी खर्च से पैसों की बर्बादी हुई।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

पैसा वैसे ही है जैसे शरीर में रक्त का संचार होता है। समाजरूपी शरीर में पैसेरूपी रक्त  का संचार होता है। यब वह रक्त है जो समाज को जीने के लिए सशक्त और जीवंत बनाता है।

आपने उस बीमारी के बारे में सुना होगा जिसमें रक्त रुक जाता है और उसका संचार नहीं हो पाता ।तब रक्त के थक्के जमने लगने हैं और वह ब्लाक हो जाते हैं और शरीर में रक्त का संचार नहीं हो पाता। तब आप लकवाग्रस्त हो जाते हैं ।यदि ह्रदय में थक्के जमने लगते हैं तो आप मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।

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