परिवर्तन

आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन ने सनसनी-सी फैला दी है। इसके चलते कई समीक्षक अपनी भविष्यवाणियों का फिर से मूल्यांकन कर रहे हैं। इसने राजनेताओं को भी अंततः बदलती स्थिति की ओर ध्यान देने पर मजबूर कर दिया है। यहां दो प्रश्न उठते हैं- क्या यह सिर्फ एक बार होने वाली घटनाओं में से है या फिर एक नई राजनीति की शुरुआत है? और देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण भारत में ऐसी राजनीति का भविष्य क्या है?

बीते 15 जुलाई को आयरिश रॉक स्टार व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता बोनो को फ्रेंच गणराज्य के ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स का कमान्डर बनाया गया। अब शायद वे ही फ्रेंच पार्लियामेंट को “साउंड इकोनॉमिक्स” सिखा सकें। यहां कि पार्लियामेंट लाभ कमाने वाली कम्पनियों को फैक्ट्रियों को बंद करने से रोकने के लिए एक और सोशलिस्ट कानून लाने के बाबत विचार कर रही है।

बोनो? क्या ये वही नहीं हैं जो आर्थिक विकास की समस्याओं के लिए सरकारी समाधान की वकालत के लिए ज्यादा जाने जाते हैं?