नैतिकतावादी

देश के पांच राज्यों में लोकतंत्र का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान चुनावी रणभूमि में अपना भाग्य आजमाने वाले नेताओं ने नियमानुसार अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा भी दिया। समस्या यह है कि संपत्ति की जानकारी मिलते ही हंगामा शुरू हो जाता है कि फलां उम्मीदवार के पास इतनी संपत्ति है, कहां से उसके पास इतना पैसा आ गया? जिसके पास संपत्ति अधिक दिखती है, नैतिकतावादी उसे घेरने लगते हैं, जैसे उसने चोरी की हो, घोटाला किया हो या लूटकर संपत्ति बनाई हो। यह क्या बात हुई?