नीति

जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में बैठे लोग

जानकारी के मुताबिक पिछले पांच वर्षों के दौरान भारतीय कंपनियों ने छह बड़े राजनीतिक दलों को 4,400 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि दान में दी है। इन दलों के नाम हैं- कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)। भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जुटाए गए ये आंकड़े टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। राजनीतिक दलों को जिस पैमाने पर धन की आवश्यकता होती है उस लिहाज से देखा जाए तो यह धनराशि काफी कम प्रतीत होती है। लेकिन यह याद रखना होगा कि कारोबारी घरानों द

न संसाधनों का अभाव न क्षमता का, अभाव है सही आर्थिक नीति का