निगलते

नरेगा कि सबसे बड़ी समस्या अकुशल श्रमिको को काम मुहैया करने की भी है जो इस योजना का घोषित उद्देश्य है ! इसमें कोई ऐसी नीति नहीं है जो सार्वभौमिक रूप से रोजगार को पैदा करने कि क्षमता रखती है ! न ही इसमें कोई दीर्घकालिक नीति या योजना है ! सही मायने में यह एक अल्प अवधि परक  आकस्मिक योजना है जो सूखे या आकाल से प्रभावित  क्षेत्रों या उन भागों में चलाई जाती है जो विकास कि धारा से कही पीछे छूट गए है,लेकिन यह तो सामाजिक कार्यकर्ताओ से भरे एनएसी का अति उल्लास पूर्ण कार्य है ! जिसमे रमेश और सोनिया दोनों शामिल है ! ऐसे में यह समझ से परे है !

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( सप्रंग ) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए गत तीन साल कुछ अच्छे नहीं रहे ! बीते वर्षों में इनके लिए जो उपयोगी  विषयवस्तु थी, वह अब करीब- करीब  समाप्त हो गई है ! २००९ के आम चुनाव की अभूतपूर्व सफलता के चिन्ह अब जाते नजर आ रहे है ! आज भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार दोराहे पर खड़ी है ! और भारत की विकास प्रकिया ठहर गई है ! इसकी अर्थव्यवस्था अपने ढलान पर है ! इसके सैद्धांतिक मुखिया डॉ. मनमोहन सिंह है ! जिनकी तारीफ करते एक समय  पूरे विश्व की मीडिया थकती नहीं थी , पर आज उन्हें अंडर-एचीवर (टाइम ) बताया जा रहा है !