नरसिम्हा राव

कुछ दिनों पहले रविवार की रात एक टीवी शो में एंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 5 लाख करोड़ डॉलर के जीडीपी के लक्ष्य का तिरस्कारपूर्व बार-बार उल्लेख किया। यह शो हमारे शहरों के दयनीय पर्यावरण पर था और एंकर का आशय आर्थिक प्रगति को बुरा बताने का नहीं था, लेकिन ऐसा ही सुनाई दे रहा था। जब इस ओर एंकर का ध्यान आकर्षित किया गया तो बचाव में उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि तो होनी चाहिए पर पर्यावरण की जिम्मेदारी के साथ। इससे कोई असहमत नहीं हो सकता पर दर्शकों में आर्थिक वृद्धि के फायदों को लेकर अनिश्चतता पैदा हो गई होगी।

Author: 
गुरचरण दास

दागी नेताओं को अयोग्य ठहराने और नकारात्मक मतदान को वैधता देने वाले सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला, एक अरसे से लंबित चुनाव सुधार की जरूरत को बल प्रदान करने वाले हैं। इन फैसलों पर देश में व्यापक सकारात्मक प्रतिक्रिया का आना, संकेत है कि चुनाव सुधार के पक्ष में जनमत तैयार हो रहा है। सुधार को लेकर चुनाव आयोग पहले से ही कोशिशें करता रहा है, लेकिन एक स्वस्थ लोकतंत्र में बदलाव और सुधार की जो प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए वैसा कुछ फिलहाल नहीं दिख रहा। जो समाधान लोकतंत्र के सर्वोच्च निकाय संसद से निकलना चाहिए वो न्यायालय से न