नक्सलवाद

फिर देखने को मिले वे दर्दनाक नजारे। वे तिरंगे में लिपटे हुए कच्ची लकड़ी के ताबूत, उन पर रखी गई गेंदे के फूलों की मालाएं...उन बहादुर जवानों को इस देश के लोगों की आखिरी भेंट। फिर सुनने को मिले हमारे गृह मंत्री से वही भाषण, जो हम बहुत बार सुन चुके हैं। हम नहीं बख्शेंगे उनको जिन्होंने ऐसा किया है, हत्यारों को ढूंढेंगे हम और उनको दंडित करेंगे।

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी ने दैनिक जागरण की ओर से उठाए गए सवालों के जैसे जवाब दिए हैं उनसे यह और अच्छे से साबित हो रहा है कि नक्सली नेता वैचारिक रूप से बुरी तरह पथभ्रष्ट हो चुके हैं और वे अपनी ही बनाई दुनिया में रह रहे हैं। वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त कर न केवल सत्ता हथियाने का मंसूबा पाले हुए हैं, बल्कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने सत्ता संचालन का अधिकार वैधानिक तरीके से अर्जित कर लिया है। यदि वे इस खुशफहमी में नहीं होते तो सगर्व यह नहीं कह रहे होते कि फिरौती-उगाही करना इसलिए जायज है, क्योंकि उन्हें इतने बड़े तंत्र को चलाना पड़ रहा है। वे जिसे अ