दोषी

हाल ही में मदर टेरेसा के निधन ने सारे विश्व का ध्यान कलकत्ता और आमतौर पर भारत की  दारुण गरीबी की ओर आकर्षित किया। मदर टेरेसा ने  बेहद गरीब देश के सबसे गरीब  लोगों की सेवा की । जिस देश में संन्यास,भौतिकवाद का विरोध और भाग्यवाद वहां के बहुसख्यकों के धर्म हिन्दू का अपरिहार्य अंग हैं।जो लोग इन सिद्धांतो का अनुकरण करते है  उनके लिए गरीबो की आर्थिक स्थिति को बदलने की कोशिश फिजूल है। उनके लिए गरीबी नहीं वरन समृद्धि अचरज का विषय है।