दुर्व्यवहार

राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा जंग-ए-आजादी के समय लिखी गई कविता “अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि उस दौर में हुआ करती थी। महिलाओं की स्थिति के बाबत कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संस्था ‘वुमन्स रीजनल नेटवर्क’ (डब्लूआरएन) द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र तो कम से कम यही प्रदर्शित करता है। संस्था द्वारा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के कॉन्फ्लिक्ट जोन (संघर्ष वाले क्षेत्रों) में निवास करने वाली महिलाओं की स्थिति का सैन्यीकरण, सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे तीन महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर आंकलन किया गया।

- घरेलू नौकर उपलब्ध कराने वाली दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसियों की हकीकत पर आधारित ‘संस एंड डॉटर’ डॉक्यूमेंट्री ने किया सोचने पर मजबूर

-  जीविका फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन विभिन्न देशों की दस डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

“नरेला इलाके में घर के बाहर खेल रही 6 साल की बच्ची को बहला फुसलाकर पड़ोसी ने किया बलात्कार। अजमेरी गेट इलाके की 14 वर्षीय छात्रा के साथ अध्यापक द्वारा चार साल से किये जा रहे यौन शोषण मामले का सनसनीखेज खुलासा। सफदरजंग अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए देररात महिला वार्ड में घुसकर गर्भवती महिला के साथ बलात्कार का प्रयास। मुंडका में नाबालिक युवती के साथ पड़ोसी द्वारा बलात्कार। उत्तर पश्चिम जिले के महेंद्र पार्क में रूई मांगने के बहाने सर्वोदय विद्यालय की नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ पड़ोसी युवक द्वारा बलात्कार।“