दुनिया

ध्यान हो तो धन भी सुंदर है। ध्यानी के पास धन होगा, तो जगत का हित ही होगा, कल्याण ही होगा। क्योंकि धन ऊर्जा है। धन शक्ति है। धन बहुत कुछ कर सकता है। मैं धन विरोधी नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं, जो समझाते हैं कि धन से बचो। भागो धन से। वे कायरता की बातें करते हैं। मैं कहता हूं जियो धन में, लेकिन ध्यान का विस्मरण न हो। ध्यान भीतर रहे, धन बाहर। फिर कोई चिंता नहीं है। तब तुम कमल जैसे रहोगे, पानी में रहोगे और पानी तुम्हें छुएगा भी नहीं। ध्यान रहे, धन तुम्हारे जीवन का सर्वस्व न बन जाए। तुम धन को ही इकट्ठा करने में न लगे रहो। धन साधन है, साध्य न बन

विपक्ष के नेता लालकूष्ण आडवाणी ने 22 जून को मुंबई में कहा कि रैनबैक्सी  का जापानी कंपनी के हाथों बिकना राष्ट्रिय हितों के साथ धोखाधड़ी है ! उन्होंने यह भी कहा कि हमें सोचना चाहिए कि ऐसे सौदे से सस्ती दवाओं  की सुलभता पर कैसा असर पड़ता है ! श्री आडवाणी यह मानकर चल रहे है की भारतीय रैनबैक्सी  किसी विदेशी रैनबैक्सी की अपेक्षा अपनी दवाएं सस्ते दामों पर बेचेगी ! हकीकत यह है की कीमतों का भारतीय या विदेशी होने से कोई लेना देना नहीं है ! कीमतें बाजार में प्रतिस्पर्धा से निर्धारित होती है!

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सुखिया ये संसार है खावे अरू सोये, दुखिया दास कबीर है जागे अरू रोये।