दिल्ली

जब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का झंडा अन्ना हजारे के हाथों से अरविंद केजरीवाल के पास आया तो इसमें एक नया जोश देखने को मिला। पिछले कुछ हफ्तों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खुलासे सामने आए। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई सफल होती है या नहीं, लेकिन यह अपने पीछे एक बड़ी उपलब्धि छोड़ रही है। इसने मध्य वर्ग को जगा दिया है और शशि कुमार की कहानी इसे साबित करती है।

Author: 
गुरचरण दास

सम्पूर्ण विश्व में शहरीकरण श्रम विभाजन की सहायता से समृद्धि बढ़ाता है। इसलिए भारत जैसे देशों में शहरीकरण को संपन्नता बढ़ाने के साधन के रूप में अपनाना सरकार के पिछले 50 वर्षों के प्रयासों (ग्रामीण विकास के नाम पर निर्रथक धन का व्यय) की अपेक्षा बेहतर विकल्प है। अभी हाल ही के आर्थर एंडरसन फार्च्यून के विश्वव्यापी सर्वे में भारत के शहरों को सबसे खस्ताहाल स्थिति में पाया गया। निश्चित ही संपन्न देश होने का यह तरीका नहीं है।

सर, हमारी मदद कीजिए। हम पढ़ना चाहते हैं लेकिन हमारी टीचर हमसे सर मालिश कराती हैं। हाथ-पांव दबवाती हैं। क्लास छोड़कर घूमने चली जाती हैं और कहती हैं कि प्रिंसिपल पूछे तो कह देना कि स्टेशनरी (किताब आदि) लेने गई हैं। और तो और क्लास को शांत रखने और उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी मॉनिटर पर थोप जाती हैं।

सर, हमारे स्कूल में टीचर सोती रहती हैं और कुछ पूछने जाने पर झिड़क कर भगा देती हैं। सर, स्कूल में पढ़ाई की बजाए हम छात्र-छात्राओं से साफ सफाई कराई जाती है। हमें रोल नंबर के अनुसार प्रतिदिन बारी बारी कक्षा में झाड़ू व साफ सफाई करनी पड़ती है।

वॉशिंगटन डीसी में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु एक सच बात कह गए। उन्होंने वहां उपस्थित अपने श्रोताओं से कहा कि उनकी सरकार की निर्णय क्षमता पंगु हो चुकी है और २०१४ के चुनावों तक किसी तरह के सुधारों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। अलबत्ता, बाद में उन्होंने इस बयान का खंडन किया, क्योंकि इससे उन्हीं की सरकार की फजीहत हो रही थी, लेकिन सच्चाई तो यही है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, जो भारत में पिछले दो सालों से नहीं कहा जा रहा था। वॉशिंगटन में बसु के श्रोता हैरान थे कि भारत जैसा जीवंत लोकतंत्र, जो एक उभरती हुई आर्थिक ताकत है और जिसकी सिविल सोसायटी ऊर्जावान है, की स

Author: 
गुरचरण दास

दिलवालों की नगरी मानी जाने वाली दिल्ली ने प्रख्यात पार्श्व गायिका आशा भोंसले का दिल तोड़ दिया। यहां आयोजित एक समारोह के दौरान दिल्ली के अंग्रेजीदां लोगों ने उन्हें बेहद उदास और निराश कर दिया और वह कहने को मजबूर हो गई कि 'पहली बार पता चला दिल्ली में केवल अंग्रेजी ही बोली जाती है।' आलम यह रहा कि आशा ताई द्वारा इस बाबत ईशारा करने के बावजूद मंच संचालक व आयोजक उनकी इच्छा को भांपने में असफल रहे। परिणाम यह हुआ कि कार्यक्रम के शुरुआत में काफी खुश दिख रही आशा ताई की भाव-भंगिमाएं गंभीर होती गई और समापन होते होते उनका मूड भी खराब हो गया। यहां तक कि आशा ने आयोजकों द्वारा अपने

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