दिल्ली विश्वविद्यालय

किसी कॉलम में ऐसे विचार लिखना आसान नहीं है जो लहर के खिलाफ हों खासतौर से उन अच्छे इरादे वाले लोगों के खिलाफ जिन्हें हमने खुद प्रोत्साहित किया है। मुझे ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा जब मैंने आप और उनके संभलकर चलने की जरूरत के बारे में लिखा। आम आदमी पार्टी इन दिनों सबकी पसंद है। मीडिया उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है। गरीब उसे अपना मसीहा मानते हैं। बोर हो चुके अमीर एक्जीक्यूटिव अपनी नौकरी छोड़कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा आप को बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनने और लोकसभा चुनाव जीतने की चर्चा है।

स्कूल से सीधे घर जाएं और अगर कहीं दूसरी जगह जा रहे हैं तो अपने माता-पिता को बताकर जाएं। महिला सुरक्षा के मामले में लगातार फजीहत झेल रही दिल्ली पुलिस के नाम से ऐसी तमाम नसीहतें देने वाले होर्रि्डग व बैनर दिल्ली विश्वविद्यालय के अग्रणी कॉलेजों और अन्य शिक्षा संस्थानों के बाहर पिछले दिनों दिखाई दिए। इन पर दिल्ली पुलिस का ईमेल और फोन नंबर भी लिखे हैं। इन नसीहत भरे पोस्टरों पर लोगों के आपत्ति उठाने के बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस कह रही है कि वह बता नहीं सकती कि ये बैनर किसने लगाए हैं। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी जानकारी होने से इन्कार कर दिया