दवाओं को सस्ता करना

 

हाल ही में दवा मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत 652 दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया गया है। पहली नजर में यह फैसला आम आदमी के हित में दिखता है। इसके लागू हो जाने से दवाओं की कीमतों में औसतन 20-25 फीसदी की कमी होने की संभावना है। कुछ दवाओं की कीमतें तो 80 फीसदी तक घट सकती हैं। ये दवाएं एलर्जी, हृदय संबंधी, गैस्ट्रो-इन्टेस्टाइनल, मधुमेह, तपेदिक और कुष्ठ रोग वगैरह की हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि मूल्य नियंत्रण हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता। इसके साथ ही सरकारी हस्तक्षेप का दायरा बढ़ने से भ्रष्टाचार के नए मौके भी उत्पन्न होते हैं।