डा. अंबेडकर

"संविधान एक अद्भुत मंदिर था जिसका निर्माण हमने देवताओं के रहने के लिए किया था लेकिन इससे पहले कि वे वहां स्थापित होते शैतानों ने उसपर कब्ज़ा जमा लिया। इसलिए, अब हम केवल एक काम कर सकते हैं, और वह काम है इस मंदिर को जलाकर खाक कर देना" - डा. भीमराव अंबेडकर, स्त्रोतः द टाइम्स ऑफ इंडिया, 20 मार्च 1955.
हममें से अधिकांश लोग डा. भीमराव अंबेडकर को एक अधिवक्ता, दलित नेता और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार के तौर पर पहचानते हैं। लेकिन कम ही लोगों को पता है कि डा. अंबेडकर एक निपुण अर्थशास्त्री भी थे। उनके पास न केवल लॉ की डिग्री थी बल्कि उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से 1915 व 1927 में क्रमशः अर्थशास्त्र में एमए व पीएचडी भी की थी।  
 
"सागर में समाकर अपनी पहचान खो बैठने वाली पानी की बूंद से इतर, मनुष्य समाज में रहकर भी अपनी पहचान नहीं खोता है।
मानव जीवन स्वतंत्र होता है। मनुष्य का जन्म केवल समाज की उन्नति के लिए नहीं बल्कि स्वयं की उन्नति के लिए होता है..."
 
Category: